आचार्य वीरसेन स्वामी जी की मनोरंजक/ विनोदपूर्ण युक्ति –> सिद्ध भगवान को बहिरात्मा कह सकते हैं क्योंकि वे कर्म रूपी गर्भ के बाहर हैं। संसारी, अंतरात्मा क्योंकि गर्भ के अंदर हैं।
आचार्य श्री विद्यासागर जी (समयोपदेश भाग – 1)
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने अंतरात्मा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अंतरात्मा में रहना परम आवश्यक है।
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आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने अंतरात्मा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अंतरात्मा में रहना परम आवश्यक है।
Bahut hi innovative tareeka hai, ‘अंतरात्मा’ aur ‘बहिरात्मा’ ko dekhne ka ! Acharya Shri ke charnon me shat shat naman !