Day: May 8, 2026

अंतरात्मा

आचार्य वीरसेन स्वामी जी की मनोरंजक/ विनोदपूर्ण युक्ति –> सिद्ध भगवान को बहिरात्मा कह सकते हैं क्योंकि वे कर्म रूपी गर्भ के बाहर हैं। संसारी,

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पुण्य

आचार्य श्री विद्यासागर जी कहते थे, “पाप मल है, पुण्य जल है। मल धोने के लिए जल आवश्यक है।” आचार्य श्री समयसागर जी

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मंगल आशीष

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May 8, 2026