अर्थी उठने पर ही, (जीवन का) अर्थ (निस्सारता) समझ आता है।
जिसकी अर्थी उठी, वह तो समझ नहीं पाया/ पायेगा, उठाने वाले तो समझें !
चिंतन
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अर्थी को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः अर्थी ले जाने वालों को समझना आवश्यक है कि जीवन में मनुष्यों को वैराग्य के भाव आना परम आवश्यक है, ताकि आत्मा का कल्याण करना परम आवश्यक है।
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अर्थी को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः अर्थी ले जाने वालों को समझना आवश्यक है कि जीवन में मनुष्यों को वैराग्य के भाव आना परम आवश्यक है, ताकि आत्मा का कल्याण करना परम आवश्यक है।