आयु का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जीवन में धर्म को प्रारम्भ करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं है, अतः जैन धर्म के सिद्धांत पर आठ वर्ष की आयु से धर्म प्रारम्भ करना परम आवश्यक है।लोग इस सोच में लगे रहते हैं कि अब शूरुआत करता हूं, लेकिन समय की बर्बादी होती है। अतः जीवन के कल्याण हेतु शीघ्र से शीघ्र प़ारम्भ करना आत्म कल्याण हो सकता है।
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आयु का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। जीवन में धर्म को प्रारम्भ करने की कोई सीमा निर्धारित नहीं है, अतः जैन धर्म के सिद्धांत पर आठ वर्ष की आयु से धर्म प्रारम्भ करना परम आवश्यक है।लोग इस सोच में लगे रहते हैं कि अब शूरुआत करता हूं, लेकिन समय की बर्बादी होती है। अतः जीवन के कल्याण हेतु शीघ्र से शीघ्र प़ारम्भ करना आत्म कल्याण हो सकता है।