पहले गुणस्थान का नाम है “मिथ्यात्व” पर हैं वे मिथ्यादृष्टि।
पानी में पड़ी लकड़ी को मिथ्यादृष्टि टेड़ी ही मानेगा। जबकि सम्यग्दृष्टि कहेगा… है तो सीधी पर दिख रही है टेड़ी।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
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दृष्टि का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु मिथ्यात्व दृष्टि से बचना परम आवश्यक है। अतः जीवन में सम्यग्दृष्टि होना परम आवश्यक है।
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दृष्टि का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु मिथ्यात्व दृष्टि से बचना परम आवश्यक है। अतः जीवन में सम्यग्दृष्टि होना परम आवश्यक है।