धर्म/संकट
धर्म वो नहीं जो संकटों को टाल दे, बल्कि वो जो संकटों में सम्हाल ले।
देखा जाय तो धर्मात्माओं पर संकट आते तो है पर उनको छूते नहीं। क्योंकि संकट तो शरीर पर आते हैं और धर्मात्मा अपने आपको शरीर मानते नहीं, अपने को आत्मा ही मानते हैं।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी



