पाप
पाप भी दो रूप –>
- विनाश रूप।
- विकास रूप/ समाज की मान्यता प्राप्त।
जैसे कानून के तहत फाँसी, सूकर शेर को मारकर ५वें स्वर्ग गया, उपगूहन-अंग के लिये सेठ का झूठ बोलना, अब्रह्म को व्रत का रूप (स्वदार-संतोष) दिया; लक्ष्मण ने रावण को नहीं पाप को मारा, रावण ने पाप को शरण दी, इसलिये वह मारा गया।
निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी




One Response
पाप का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। आत्मा के कल्याण हेतु पापों से बचना परम आवश्यक है।