भेद-विज्ञान

भेद-विज्ञान दिखता है ।
भेद करके ज्ञान करना ही सच्चा विज्ञान/ भेेेद-विज्ञान हैै ।
भेद पहले बाह्य पदार्थों से, फिर आत्मा और कर्मों में करना चाहिए ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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4 Responses

  1. भेद विज्ञान का मतलब शरीर आदि पर-द़व्यो से आत्मा भिन्न है,ऐसा अनुभव या ज्ञान होना है।
    अतः उक्त कथन सत्य है कि भेद विज्ञान दिखाता है कि भेद करके ज्ञान करना सच्चा विज्ञान और भेद विज्ञान है।भेद पहले ब़ाह्य पदार्थों से, फिर आत्मा और कर्मों में करना चाहिए। जैन धर्म ही भेद विज्ञान पर आधारित है।

    1. जब “पर” और स्वयं में भेद करोगे तब दोनों categories अलग-अलग दिखने लगेंगी न !
      दूसरे शब्दों में भेद-विज्ञान झलकने/ दिखने लगेगा ।

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