Month: February 2026
दिगम्बरत्व
वैदिक दर्शन में गांधारी ने दुर्योधन के शरीर को वज्र जैसा बनाने के लिये उसे दिगम्बरत्व धारण करने को कहा। अपूर्णता के कारण पूरा शरीर
आश्रम
राग से निवृत्ति के लिये… वानप्रस्थ आश्रम। द्वेष से निवृत्ति के लिये… वृद्धाश्रम। (वहाँ अपने को बनाये रखने के लिये द्वेष को कम करते करते
पूजा
पूजा के अंत में “इत्याशीर्वाद” बहुत महत्त्वपूर्ण है। पूजा का फल –> प्रभु का अशीर्वाद (प्रभु के गुण पाने हेतु)। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
सत्य
सत्य प्रकट करने की अगर ज़िद ही है तो अपना सत्य प्रकट करें, तुम्हारा तुरंत लाभ, देखने वाले प्रभावित होंगे और वे भी प्रेरित होंगे
प्रमाद
8 प्रकार की शुद्धि(काय, भाव, भाषा, विनय, ईर्यापथ, भैक्ष, शयनासन, प्रतिष्ठापन) की कमी से प्रमाद आता है। प्रमाद से बचने के लिए 5 समिति, 3
उपलब्धि / संतोष
उपलब्धि थोड़े समय का संतोष है, संतोष हमेशा की उपलब्धि। मुनि श्री मंगलानन्द सागर जी
अतिशय
अतिशय भक्तों की भक्ति से होते हैं, भगवान/ गुरु नहीं करते। भगवान के 34 अतिशय भक्तों के काम के नहीं। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
पाप
पाप के पास के फ़ायदों से अच्छा, दूर के नुकसान देखें। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
बुद्धि / अबुद्धि
पुरुषार्थ, विकास, विनाश बुद्धि पूर्वक तो होते ही हैं, अबुद्धि पूर्वक भी होते हैं। जैसे भरत चक्रवर्ती के 923 पुत्रों ने निगोद से मोक्ष तक
विज्ञान
विज्ञान… जिसमें निरन्तर खोज चालू रहे, अंतिम निष्कर्ष कभी न मिले। गुरुवर मुनि क्षमासागर जी
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