जब आत्मा और परमात्मा दोनों अंदर ही हैं तो उनके मिलने का रास्ता भी तो अंदर ही होगा न !
(मंजू रानीवाल)
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4 Responses
आत्मा/परमात्मा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मा को पहिचान करना परम आवश्यक है, इसके बाद परमात्मा बनने के लिए सभी विकारों को समाप्त करना परम आवश्यकता है।
आत्मा ही तो परमात्मा बनती है, बाहर का शरीर थोड़े ही। आत्मा ही परमात्मा बनेगी तो आत्मा भी अंदर परमात्मा भी अंदर, बाहर तो शरीर है।गुरुजन इसीलिए तो कहते हैं, सोहम सोहम, मेरी आत्मा भी परमात्मा रूप ।
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आत्मा/परमात्मा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए आत्मा को पहिचान करना परम आवश्यक है, इसके बाद परमात्मा बनने के लिए सभी विकारों को समाप्त करना परम आवश्यकता है।
‘परमात्मा’ ko andar kyun bataya ? Iska reason explain karenge, please ?
आत्मा ही तो परमात्मा बनती है, बाहर का शरीर थोड़े ही। आत्मा ही परमात्मा बनेगी तो आत्मा भी अंदर परमात्मा भी अंदर, बाहर तो शरीर है।गुरुजन इसीलिए तो कहते हैं, सोहम सोहम, मेरी आत्मा भी परमात्मा रूप ।
Okay.