Whatever you Give to others, will come back to you in multiples..
You can’t stop what is coming back, but you can always choose what to Give.

(Sri Sanjay)

क्या बीमार आदमी को झोंपड़ी से निकालकर महल में लाने से, वह निरोगी हो जायेगा ?
क्या कांच को सोने की अगूँठी में जड़वाने से, वह हीरा बन जायेगा ?

जब तक अंदर की कलुषता नहीं जायेगी, शांति आ नहीं सकती ।

जिसकी आने की तिथि निश्चित न हो,
ऐसे महमान के आने पर आप घबराते हैं, दुखी होते हैं या उनका स्वागत करते हैं ?

मृत्यु भी तो अतिथि है, उसका स्वागत क्यों नहीं करते ??

चिंतन

1) पिछ्ले नव-वर्षों में जितनी खुशियाँ मिली हों, वे सब इस नववर्ष में मिलें,
जितने धर्म-कर्म पिछ्ले नव-वर्षों में किये हों,वे सब इस नववर्ष में तथा अगले नये वर्षों तक करते रहें ।

2) नववर्ष में हम सब की कमजोरियाँ  कमजोर हों,
और मजबूतियाँ  मजबूत हों ।

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