उत्तम क्षमा :-

  • क्रोध की परिस्थितियां मिलने पर भी गुस्सा ना करना ।
  • हजार चिनगारियों के पास एक व्यक्ति भी नहीं आता,
    शहद की एक बूंद पर हजारों चीटियां आकर्षित होती हैं ।
  • ‘Welcome(वैलकम)’ की उपेक्षा करने वाला बैल है ।
  • क्रोध शरीर में खून की तरह रहता है, बात की सूई चुभते ही बहने लगता है ।
  • क्रोध के Action पर Control ना हो तो चलेगा, पर क्रोध का Reaction तो मत करो ।
  • क्रोध से ज्यादा क्रोध की गाँठ बुरी है ।
  • कभी संवाद मत बंद करना ।
    पति पत्नि में संवाद बंद हो गया था,
    पति ने स्लिप लिखकर पत्नि को दी – सुबह 4 बजे जाना है, उठा देना ।
    किसी ने उठाया नहीं ट्रेन निकल गई, तकिये की साइड़ में स्लिप रखी थी –  उठो 3 बज गये हैं ।
  • गालीयों का Stock Limited   होता है, वह 48 मिनिट से ज्यादा नहीं चल पाता ।
    उस मुहुर्त को टाल दें, 5 गहरी सांस लें या 5 कदम पीछे चलने के बाद React करें तो क्रोध शांत हो ही जायेगा ।

मुनि श्री सौरभसागर जी

श्री आतिफ़ ( आशीषमणी) के मित्र  Canada में कार्यरत हैं, मुझसे मिलने बस से आ रहे थे जबकि घर में गाड़ीयां थीं ।

पूछने पर बताया – जब मैं अकेला चलता हूं, तब कार का प्रयोग नहीं करता हूँ और उससे जो बचत होती है वो पैसा मैं दान में देता हूँ । क्योंकि वो पैसा मैंने अपनी सुविधाओं को कम करके बचाया है, उस पर मेरे परिवार का अधिकार नहीं है ।
युवा आतिफ़ की ऐसी भावनाओं से हम भी कुछ सीखें !

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