शाकाहारी जीवों को कैसे पहचानेंगे ?

1. शाकाहारी जीवों की आँखें गोल न होकर लम्बाई लिये होती हैं।
2. नाखून नुकीले नहीं होते, चौड़े/ चपटे होते हैं जैसे गाय, घोड़ा
3. मांसाहारी शरीर को ठंडा रखने के लिये जीभ बाहर निकाले रखते हैं।
हमारे अंदर ये शाकाहारी लक्षण होते हुए भी हम प्रकृति के विपरीत क्यों ?

(अरविंद)

गरीब शिक्षक दूर स्कूल पैदल जाता था। कभी कोई अपने वाहन में बैठा लेता।
कुछ दिनों बाद उसने मोटर साइकिल खरीद ली। अब वह सबको Lift देने लगा। एक दिन उसकी मोटर साइकिल एक ठग छीन ले गया।
अगले दिन मोटर साइकिल उसके घर के बाहर खड़ी थी, साथ में एक चिट्ठी थी → जहाँ भी जाता हूँ, सब यही पूछते हैं, मास्टरजी की मोटरसाइकिल तुम्हारे पास कैसे आयी ? कबाड़ी भी खरीदने को तैयार नहीं है।
परोपकार का फल !

(एकता-पुणे)

शतरंज के खेल में वज़ीर को बचाने का अधिकतम पुरुषार्थ किया जाता है, जिसने बचा लिया वो खेल जीत गया।
जीवन के खेल में ज़मीर को बचाने का कितना प्रयास ?
जिसने बचा लिया समझो वह खेल जीत गया।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

दुःख में ज्यादा दुखी होंगे तो दु:ख ज्यादा होंगे।
दुःख में कम दुखी होगे तो दु:ख कम होंगे।
जैसे शरीर पर से साँप निकलना दुःख का कारण। यदि चीख पुकार की तो साँप डस लेगा, दुःख बहुत ज्यादा। शांति से भगवान का नाम लेते रहे तो दुःख कम।

चिंतन

जानवर जब संयम में नहीं होते तब खुरों से जमीन खोदते हैं, इसलिये उन्हें खुराफाती कहते हैं।
खुराफाती मनुष्य यह काम मन से करते हैं (बिना बात, भूत काल की बातों को खोदते रहते हैं)।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

सम्मान/ प्रतिष्ठा की चाहत उतनी ही करनी चाहिए,
जितना देने का सामर्थ्य रखते हो।
क्योंकि….
जो देते हो उससे ज्यादा वापिस कैसे और क्यों मिलेगा !

(अनुपम चौधरी)

समस्या तात्कालिक है,
व्यवस्था त्रैकालिक,
समस्या व्यवस्था है, कर्मों की।
यदि समस्या को व्यवस्था मान लिया (कर्मों की) तो समस्या समाप्त, लेकिन यदि समस्या को अवस्था माना तो दु:ख।

मुनि श्री सुधासागर जी

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