राग-द्वेष

राग – ये पेन्सिल अच्छी है ।
द्वेष – ये पेन्सिल बुरी है ।
मोह – ये पेन्सिल मेरी है/मुझे मिल जाये ।
सच्चा ज्ञान – ये तो बस पेन्सिल है, लिखने के काम आती है ।

इष्टोपदेश – (अंजू)

Share this on...

One Response

  1. रागिनी का तात्पर्य इष्ट पदार्थों में प्रीति या हर्ष रुप परिणाम होना है, द्वेष का मतलब जो काय,मान आश्रित,शोक,भय यह विविध रुप होते हैं।
    अतः उपरोक्त उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। सच्चा ज्ञान वही है जिसमें राग द्वेष के भाव नहीं होते हैं। अतः धर्म से जुड़कर अपने राग द्वेष के भाव समाप्त करना परम आवश्यक है ताकि जीवन का कल्याण हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives
Recent Comments

April 16, 2022

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31