शिविर के महत्वपूर्ण बिंदु

शिविर में 10 दिन रहकर यह महसूस किया होगा कि कितनी चीजें/ क्रियाएं और व्यवहार घर पर अनावश्यक करते थे ! जब उनके बगैर काम चल गया तो उन्हें कम क्यों नहीं किया जा सकता ?
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज बहुत पहले रामटेक में थे। एक दल मुनिराजों की दैनिक चर्या को रिकॉर्ड करने आया।आचार्य श्री से जब इजाज़त मांगी तो उन्होंने कहा ज्वार बाजरा खरीदते समय बहुत सारे सैंपल मिल जाते हैं लेकिन हीरे जवारत खरीदते समय कभी किसी ने सैंपल दिया? दिगंबर मुनियों की चर्या ऐसी ही है। इसको सुलभ न बनाएं।
घर जाकर नई दिनचर्या में ढलेंगे तब यह न लगे कि हम ढल रहे हैं, बल्कि लगे कि बढ़ रहे हैं।
भगवान बनना है तो ध्यान रहे कि आज हम भगवान के अविकसित रूप हैं, जिसे हमको विकसित करना है। कमजोरियां यदि गुरु के सामने या कागज पर आ गई हैं तो आत्मविश्वास बढ़ेगा, आचरण आवरण दूर किए बिना नहीं आता।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 8 सितम्बर)

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3 Responses

  1. ‘घर जाकर नई दिनचर्या में ढलेंगे तब यह न लगे कि हम ढल रहे हैं’; iska meaning clarify karenge,
    please ?

    1. शिविर के धर्ममय वातावरण से जब घर के माहौल में दोबारा जाएंगे तब उसमें रम गए तो ढलना शुरू हो जाएगा जैसे पहले होता था। अब तो बढ़ना चाहिए ढलना नहीं।

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