अच्छाई / सच्चाई
सामने वाले में अच्छाई दिखे तो उसे सच्चाई मानो (भरोसा, परखकर)।
अपनी अच्छाई के पीछे सच्चाई परखो।
परिवार/ समाज में सच्चाई को गौण कर अच्छाई को प्रमुखता दें।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
सामने वाले में अच्छाई दिखे तो उसे सच्चाई मानो (भरोसा, परखकर)।
अपनी अच्छाई के पीछे सच्चाई परखो।
परिवार/ समाज में सच्चाई को गौण कर अच्छाई को प्रमुखता दें।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
2 Responses
अच्छाई/सच्चाई को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु अच्छाई के साथ सच्चाई होना परम आवश्यकता है। जीवन में सच्चाई का आधार होना परम आवश्यक है।
Beautiful post ! Namostu Gurudev !