जिस घर में काम कर रहे हो/ रह रहे हो उसे हल्का, दूसरे घर को बेहतर मानें/ कहें तो नुकसान होगा न !
जिस भगवान के आज/ अभी दर्शन कर रहे हो, उसे ही सर्वोत्तम मानो तभी कल्याण होगा।
चिंतन
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2 Responses
वर्तमान का भगवान् को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन में सर्व प्रथम भगवान् पर श्रद्भा एवं विश्वास करना परम आवश्यक है।जब भगवान पर विश्वास होगा तो दूसरों के घरों को अपने घरों से तुलना करना उचित नहीं है बल्कि अपने घर को उचित मान करना परम आवश्यक है।
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वर्तमान का भगवान् को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन में सर्व प्रथम भगवान् पर श्रद्भा एवं विश्वास करना परम आवश्यक है।जब भगवान पर विश्वास होगा तो दूसरों के घरों को अपने घरों से तुलना करना उचित नहीं है बल्कि अपने घर को उचित मान करना परम आवश्यक है।
Very true !