निर्लिप्तता

महावीर मुनि अवस्था में एक गाँव में लंबे समय तक ध्यान तप करते रहे। गाँव वालों ने घास की झोपड़ी बना दी। गाँव वालों ने देखा कि झोपड़ी को जानवर खा गए। महावीर अभी भी ध्यान में है।
गाँव वाले… आपने बचाया क्यों नहीं ?
महावीर… शरीर ही मेरा नहीं, उसकी सुरक्षा का भाव नहीं, तो अन्य की सुरक्षा का भाव कैसे होगा !

ब्र.(डॉ.) निलेश भैया

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One Response

  1. निर्लप्तता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु आत्मा पर श्रद्बान करना परम आवश्यक है ताकि मरने का भय नहीं रहेगा। भगवान् श्री महावीर स्वामी जी ने स्पष्ट कहा गया था कि शरीर उनका नहीं है,तो सुरक्षा का भाव नहीं रहेगा।

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