परम्परा

परम्परा का कर्ज़ लिया नहीं चुकाना होता है।
प्रो. शर्मा जी – जब दिगम्बर साधु न हों तब नकली साधु बनाकर इस परम्परा को बनाये रखना।

ब्र. डॉ. नीलेश भैया

Share this on...

4 Responses

  1. परम्परा का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए वास्तविक परम्परा का ध्यान रखना परम आवश्यक है।

    1. विरासत में पिताओं से हर बार धन मिले, ये ज़रूरी तो नहीं – कितनी ही बार कर्ज भी मिलता है। हमारी परम्पराएँ विरासत का वही कर्ज है, जिन्हें चुकाना/निभाना होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives
Recent Comments

December 2, 2025

July 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
2728293031