भाव
1. औदयिक भाव….. भरपूर भोक्ता, जैसा मिला खाया।
2. औपशमिक भाव…. मिर्ची वाले भोजन में शक्कर मिलाकर।
3. क्षायोपशमिक भाव… बड़ी मिर्ची (सर्वघाती प्रकृति) निकालकर, शेष में शक्कर मिलाकर खाना।
(क्रोध में थोड़ा प्रकट, थोड़ा दबा दिया)
4. क्षायिक भाव… जैसा परोसा गया, वैसा खा लिया।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया




3 Responses
भाव को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण हेतु उपरोक्त भावों पर ध्यान देना परम आवश्यक है। जीवन में विशुद्ध भावनाओं को रखना आवश्यक है।
Is post me ‘क्षायिक भाव – साम्भर, रहने ही दो’ ka meaning clarify karenge, please ?
सांभर दिया एज इट इस खा लिया यह था। पर मैंने इसको अब सिंपलीफाई कर दिया है… जैसा परोसा गया वैसा खा लिया