दुर्जन

दुर्जन कौन ?
जो दूषित भोजन करता हो। आचार्य श्री विद्यासागर जी कहा करते थे… दुर्जन को पहचानना कठिन, बचना भी कठिन। व्यक्ति दुर्जन से बचने का तो प्रयास करता है पर दूषित भोजन से नहीं। दूषित भोजन से बचना आसान है पर बचता कोई नहीं, जबकि दुर्जन के साथ यह उल्टा होता है। प्राय: लोग कहते हैं…हम दुर्जन नहीं, पर सच्चाई यह है कि दुर्जन के साथ रह-रह कर हम भूल जाते हैं कि हम भी दुर्जन हो चुके हैं।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 11 मई)

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4 Responses

  1. दुर्जन का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए कभी भी दुर्जन बनने का प़यास करना उचित नही है।

  2. ‘जबकि दुर्जन के साथ यह उल्टा होता है’; iska abhipraay clarify karenge, please ?

    1. दुर्जन से बचना कठिन है, फिर भी हम बचने की कोशिश करते हैं।

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