निरंतरता

यदि धर्म पुस्तकों पर बहुत दिनों तक दिमाग(Dimag) न लगाया जाए तो, उन पर दीमग(Demag)(दीमक) लग जाती है। दीमग(दीमक) का स्वभाव होता है कि वह बिना बुलाए घुस आती है, ऐसे ही बुराइयाँ हमारे जीवन में बिना बुलाए घुस आती हैं।
इसलिए समय-समय पर हमको अपनी कृतों पर तथा कृतियाँ(धर्म पुस्तकों) का निरीक्षण करते रहना चाहिए।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 2 सितम्बर)

Share this on...

One Response

  1. निरंतरता का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए नियमत धार्मिक पुस्तकों का स्वाधाय करना परम आवश्यक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This question is for testing whether you are a human visitor and to prevent automated spam submissions. *Captcha loading...

Archives

Archives

December 4, 2025

June 2026
M T W T F S S
1234567
891011121314
15161718192021
22232425262728
2930