मूल पर नज़र न रखना ही बड़ी भूल है।
मूल पर नज़र तभी जाती है जब नज़र शुद्ध हो।
नज़र शुद्ध कैसे हो ?
नज़र = ना + ज़र (धन)। धन का संग्रह करना बुरा नहीं, परिग्रह (उससे ममत्व रखना) बुरा है।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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मूल/भूल को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए हर विषय एवं वस्तू की मूल समझना परम आवश्यकता है, ताकि भूल की सम्भावना नहीं रहेगी। जीवन में किसी भी चीज का संग्रह नहीं करना चाहिए बल्कि परिग्रह से बचना परम आवश्यकता है।
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मूल/भूल को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए हर विषय एवं वस्तू की मूल समझना परम आवश्यकता है, ताकि भूल की सम्भावना नहीं रहेगी। जीवन में किसी भी चीज का संग्रह नहीं करना चाहिए बल्कि परिग्रह से बचना परम आवश्यकता है।