स्वर

नाक के बायीं साइड से जो स्वर चलता है, उसे चंद्र-स्वर कहते हैं। यह दिन में चलने वाला स्वर है। रात्रि में दायीं साइड से सूर्य-स्वर चलता है/ चलना चाहिए।
संधिकाल में 48 मिनट के लिए दोनों स्वर चलते हैं। इस समय निराकुलता के साथ धर्म क्रियाएं की जाती हैं, स्वाध्याय नहीं करना चाहिए।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 15 जून)

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4 Responses

  1. स्वर को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है।

  2. संधिकाल में स्वाध्याय नहीं karne ka logic clarify karenge, please ?

    1. उस समय भगवान की दिव्यध्वनि खिरती है। ध्यान लगाना/ सामायिक करना, यह प्रिफरेबल होता है। संधिकाल में बुद्धि भी तीव्र नहीं होती इसलिए बुजुर्ग लोग पढ़ाई के लिए भी मना करते थे और स्वाध्याय आदि के लिए भी मना किया जाता है।

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