Month: January 2025
तत्वार्थश्रद्धानं सम्यग्दर्शनम्
श्रद्धा पुनरावृत्ति पर Depend करती है। पर शाश्वतता पीछे छुप जाती है जैसे बार-बार कहना –> ये ही सत्य है – ये ही सत्य है।
Reality
(Renu- Naya Bazar Gwalior) (Sand Time Clock में समय पूर्ण होने पर पूरी रेत ऊपर से नीचे गिर कर जाती है। हमारे जीवन में वैभव
जीवों के प्रकार
जीव तीन प्रकार के: 1) धन है, इससे अनभिज्ञ: जैसे किसी ने मकान बेचा; उसके नीचे ख़ज़ाना था, किंतु उसे मालूम नहीं। ऐसे ही अभव्य
मोह
श्वेताम्बर परम्परानुसार महावीर स्वामी जब संन्यास लेने लगे तब उनकी पुत्री ने रोका। बच्ची को समझाने महावीर स्वामी ने कह दिया → मैं जल्दी लौट
निशंक
प्रारंभिक अवस्था में इतनी शंका कर लें कि आगे शंकाहीन हो जाएं। ब्र. डॉ. नीलेश भैया
मरण
संसार तथा परमार्थ में मरण उपकारी है –> घातक बीमारी में, समाधिमरण में, मरण से घरों में जन्म/ संसार चलता है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
शील
छहढाला में मुनियों के 18000 शील संकल्प-रुप कहे हैं। पूर्णता तो अयोग-केवली के होती है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (शंका समाधान – 44)
पाप / पुण्य
पाप का घड़ा छोटा होता है, जल्दी भरकर फूट जाता है। पुण्य का अनंत क्षमता वाला (मोक्ष की अपेक्षा), कभी फूट ही नहीं सकता। निर्यापक
सिद्धांत ग्रंथ
सिद्धांत ग्रंथ गृहस्थों को पढ़ने की मनाही क्यों है ? साधारण व्यक्ति को भोजन करने में विशुद्धता नहीं चाहिये, मुनि के लिये बहुत। ऐसे ही
मोक्षमार्ग
आचार्य श्री विद्यासागर जी से पूछा मोक्षमार्ग कैसा है ? आचार्य श्री… मोक्षमार्ग टेढ़ा-मेढ़ा है। फिर मोक्ष जाने के लिए कौन सा मार्ग पकड़ें ?
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