शिविर से सीख

शिविर में हम कितने धार्मिक हैं उससे ज्यादा ज्ञान यह प्राप्त किया होगा कि हम कितने अधार्मिक थे।
धीरे-धीरे शिविर की सीखें कम होंगी पर कुछ को पकड़ कर रखना होगा। उसके लिए जरूरी है सजग/ सतर्क रहना।
देखना होगा कि सुविधाओं के छोड़कर सुकून ज्यादा था या लौट कर उनको भोगने में। यह रियलाइज़ करने के बाद एनालाइज करें और एक्सरसाइज करें।
धार्मिक क्रियाओं में संजीदगी को बढ़ाना होगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/ जिंदगी से दूर रहकर अपना आत्मविश्वास बनाए रखना होगा; परजीवी बन कर न रह जाएँ।
भगवान ना सही गुणवान बनें, गुणवान बनने के लिए गुणगान करना होगा/ गुणों का ध्यान और अज्ञान का ज्ञान आवश्यक है।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 8 सितम्बर)

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4 Responses

  1. शिविर से सीख का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। श्रावकोंं ने दस दिन ज्ञान प़ाप्त करने की कोशिश की गई थी। इन दिनों में अज्ञान की जानकारी मिलती है। धार्मिक क़ियायों मे रुचि बढती रहना चाहिए। इसमें आत्म विश्वास बढता है। जीवन में सकारात्मक भाव लेकर चलना परम आवश्यक है। आजकल फालतू बातों पर ध्यान नहीं चाहिए। गुरुओं से जो सीख मिलती है वह अन्य जगह उपलब्ध नही रहती हैं।

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