Month: September 2026
अनुभव / आगम
यात्रा से लौटे ब्रह्मचारियों ने कहा कि अमुक मुनि के अनुभव से बहुत ज्ञान प्राप्त हुआ। आचार्य श्री ने उत्तर दिया, “अनुभव इतना महत्वपूर्ण नहीं।
अकड़ / पकड़
अकड़ नहीं तो पकड़ (चैंट जाना/ स्वाभिमान खो देना) भी नहीं होनी चाहिए।
सम्यक्त्वाचरण / सम्यक्चारित्र
सम्यक्त्वाचरण /सम्यक्चारित्र में अंतर ? निधि मुंबई सम्यक्त्वाचरण… सम्यग्दर्शन होने पर (4 गुणस्थान) में क्या-क्या नहीं करना! सम्यक्चारित्र… 6 गुणस्थान तथा ऊपर क्या-क्या करना! चिंतन
वर्तमान का भगवान
जिस घर में काम कर रहे हो/ रह रहे हो उसे हल्का, दूसरे घर को बेहतर मानें/ कहें तो नुकसान होगा न ! जिस भगवान
जीवों के क्रम
जीवों के क्रम… शरीरों की अपेक्षा… पृथ्वीकायिक (स्थूल) पहले, वनस्पतिकायिक (निगोदिया – सूक्ष्म) बाद में। औदारिक पहले कार्मण बाद में। संख्या की अपेक्षा… पृथ्वीकायिक पहले,
अहिंसा
संसारी जीवो में हिंसा ज़ीरो तो नहीं हो सकती। इसलिए गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी कहते थे… Minimization of Violence. प्रैक्टिस में अनर्थदंड से बचें…
याचना
लघुता क्या है ? याचना। प्रश्नोत्तरी रत्नमाला (राजर्षि अमोघवर्ष) याचना किसे कहें ? प्रार्थना + स्वार्थ सिद्धि। मुनि श्री प्रमाणसागर जी संसारी वस्तुएँ माँगने से
सिद्ध
सिद्धों के गुणस्थान क्यों नहीं ? गुणस्थान मोह तथा योग से निर्धारित होते हैं। सिद्धों में दोनों का अभाव सो गुणस्थानों के परे। लेकिन गुण
श्रद्धा / भक्ति
श्रद्धा… अज्ञात पर, भक्ति… ज्ञात पर। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी (गुरु और भगवान तो ज्ञात हैं उन पर श्रद्धा ? हाँ! ज्यादातर लोगों की
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