Month: September 2026
उत्तम सत्य धर्म
चार कषायें जब समाप्त या मंद पड़ जाती हैं तब जीवन में सत्य प्रकट होता है। जो दिखता है वह सत्य नहीं, ना दिखने वाला
साता
जीवन में साता लाने के तरीके… किसी भी क्रिया का कोटा मत तय करो, समय-सीमा बनाओ। अपने तथा दूसरों के कामों को डायरी में नोट
उत्तम शौच धर्म
लोभ का उल्टा शौच यानी पवित्रता। जितनी अपेक्षाएँ ज्यादा होंगी, उतना लोभ ज्यादा होगा। जिसके मन में लोभ आ जाए उसके आसपास का वातावरण खुशहाल
संयम
पुत्र कार चला रहा था। पिता… कितनी दूर जाना है ? Long Drive पर। क्यों ? क्योंकि ब्रेक फेल हो गए हैं। जब ईंधन समाप्त
उत्तम आर्जव धर्म
मायाचारी का उल्टा/ मन वचन काय की एकरूपता आर्जव धर्म है। एक मासोपवासी(बहुत अंतराल के बाद आहार लेने वाले) मुनिराज तपस्या करके चले गए। उसी
नय
सब्जी भी खरीदते समय चारों ओर से देखते हैं। आसपास वालों के बारे में निर्णय एक पक्ष को देखकर/ थोड़े समय में क्यों ले लेते
उत्तम मार्दव धर्म
(धर्म और गुरु की ना मानना, मान है।) मान का विपरीत, अपने मान को मान ना देना, दूसरे के मान से आहत न होना मार्दव
प्रगति के क्रम
प्रगति के क्रम… सम्यक्(सही) दृष्टि। सम्यक् ज्ञान…ये प्रभावित होता है… परिस्थिति, पूर्वकर्म/ संस्कार, संगति, पूर्वाग्रह, पूर्वानुभव, शिक्षा, अभ्यास। सम्यक् चारित्र…सम्यक् दृष्टि, सम्यक् ज्ञान पर आधारित
लब्धि
सम्यक् दर्शन, ज्ञान, चारित्र, संसार तथा परमार्थ सबके लिये अंतरंग तथा बाह्य हेतु चाहिये। क्षयोपशम लब्धि तो जन्म से प्राप्त होती है। विशुद्धि लब्धि… विशुद्धि
अहिंसा / हिंसा
दसलक्षण धर्म के प्रथम दिवस उत्तम-क्षमा की बधाई, सबसे क्षमा भाव। दृष्टि-संयम का पालन करें। लाभ…जीवों की रक्षा, ठोकर न लगना, विकारों का ना आना,
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