Month: September 2026
इंद्रिय / मन
देखा गया है कि आँख पर पट्टी बाँधकर लोग पढ़ लेते हैं। कैसे सम्भव है ? मन को ऐसा शिक्षित किया जाता है कि इंद्रियों
अपेक्षा
10 आमों में एक और मिलाया तो कुल कितने हुए ? 12 कैसे ? 10 + 1 + 1 मेरे पास पहले से था। हम
निर्लिप्तता
महावीर मुनि अवस्था में एक गाँव में लंबे समय तक ध्यान तप करते रहे। गाँव वालों ने घास की झोपड़ी बना दी। गाँव वालों ने
अर्धनारीश्वर
अर्धनारीश्वर = अर्ध ना अरि(दुश्मन) (ऐसे)ईश्वर। यानी केवली भगवान जिन्होंने आधे कर्म काट लिए हैं। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
दृष्टि
पहले गुणस्थान का नाम है “मिथ्यात्व” पर हैं वे मिथ्यादृष्टि। पानी में पड़ी लकड़ी को मिथ्यादृष्टि टेढ़ी ही मानेगा। जबकि सम्यग्दृष्टि कहेगा… है तो सीधी
वीतरागता
वीतरागता तब आती है जब राग बुरा लगने लगे, पुण्य-फल से ऊब होने लगे। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
पूर्ण
सब अपनी-अपनी अपेक्षा से पूर्ण हैं जैसे पानी से भरी छोटी तथा बड़ी बाल्टियाँ। छोटी बाल्टी में पानी और डालो तो पानी Waste ही होगा,
मैथुन / अब्रह्म
अब्रह्म पाप भाव है। मैथुन..चारित्र मोहनीय के तीव्र उदय + वेद + राग भाव से होता है (सामान्य मोह भाव जैसे भाई बहन का स्पर्श/
प्रायश्चित
एक राजा को घोड़ा बहुत प्यारा था। पर उसकी बुरी आदत से राजा को नीचा देखना पड़ता था। चलते-चलते घोड़े को खाने की चीज दिख
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