मकर संक्रांति
????आज पतंग नहीं,कर्मों को उड़ाओ।
????किसी की पतंग मत काटो,अपने कर्म काटो।
????ये कैसा मज़ा है जिसमें निरीह पक्षियों का घात हो ?
????किसी से पेच नहीं लड़ाना,अपने से लाड़ करना है।
????हार-जीत के लक्ष्य से खेल नहीं होता,भाव जुआ होता है।
????मज़ा संक्रांति में नहीं,अध्यात्म की क्रांति में है।
????चौदह जनवरी कर्म बांधने नहीं चौदह गुणस्थान पार होने को आती है।
????संक्रांति में गुड़ के नहीं,अपने अनंतगुण के लड्डू खाओ।
????तिली के लड्डू नहीं खाना बल्कि मोह को तिल तिल करके तोड़ दो।
????त्योहार तो उसे कहते हैं जिसमें आराधना का उपहार मिले।????????
(मंजू रानीवाला)




One Response
मकर संक्रांति का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है।