अनुकम्पा

दो प्रकार की अनुकम्पा –>

  • सामान्यजन के प्रति अनुकम्पा।
  • साधुजन के प्रति अनुकम्पा।
    इसमें विशेष पुण्य/ लाभ मिलेगा। Feeling विशेष होगी क्योंकि Object Higher Quality का होता है। इसमें सावधानी कि घटना ही न घटे जबकि सामान्यजन पर अनुकम्पा, घटना घटित होने के बाद में की जाती है।

मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (तत्त्वार्थ सूत्र – 6/12)

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4 Responses

  1. मुनि श्री प़णम्यसागर महाराज जी ने अनुकम्पा को परिभाषित किया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए साधुजन से अनुकम्पा रखना परम आवश्यक है।

  2. ‘इसमें सावधानी कि घटना ही न घटे’ ka kya meaning hai, please ?

    1. साधुजनों पर अनुकम्पा ऐसे कि उन पर कोई दुर्घटना घटित ना हो जाए, यह सावधानी रखना।

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