धन्यवाद

पहला धन्यवाद परमात्मा को जो हमारे आदर्श और लक्ष्य है।
2) गुरु को जिन्होंने बताया परमात्मा कौन होते हैं और उन तक कैसे जाया जा सकता है।
3) माता-पिता को जिन्होंने साधन उपलब्ध कराये।
4) साधर्मी भाइयों को जिन्होंने उस रास्ते पर चलने में मेरा साथ दिया।
अंतिम स्वयं को कि आपने इन चार का लाभ उठाने का साहस किया।

मुनि श्री सौम्य सागर जी (प्रवचन – 10 जून)

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One Response

  1. धन्यवाद का उदाहरण दिया गया है वह पूर्ण सत्य है। अतः जीवन के कल्याण के लिए परमात्मा गुरुओं, माता पिता एवं समाज के सार्धर्मी को धन्यवाद करना परम आवश्यक है। अंत में स्वयं विचार के योग्य कि सभी को आवश्यकता अनुसार धन्यवाद दिया गया है।

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