Category: वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर

पर्यावरण

नल बंद क्यों करें ! जब पानी आना बंद होगा तब नल अपने आप बंद हो जायेगा । हाँ ! जब ज़मीन में पानी समाप्त

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संतोष

मनुष्य जो पाता है, सो भाता नहीं, इसलिये साता आता नहीं । आचार्य श्री विद्यासागर जी

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आत्मा

शब्दों में क्या, आत्मा में अर्थ छिपा, कौन सोचता! आचार्य श्री विद्या सागर जी

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अहिंसा

शरीर को समय पर उचित भोजन देना अहिंसा है, जैसे किसान असाढ़ की बरसात में बुवाई करने से नहीं चूकता है। आचार्य श्री विद्यासागर जी

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कर्म-फल

बहुत दिनों से आपके घर पर किसी ने कब्ज़ा कर रखा हो तो घर छोड़ते समय तोड़फोड़ करके जाता है। ऐसे ही कर्म जब आत्मा

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शांति

मलाई कहाँ ? अशांत दूध में, ना । प्रशांत बनो । आचार्य श्री विद्यासागर जी

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सदुपयोग

ट्रकों के पीछे लिखा रहता है – “फिर मिलेंगे” । ( फिर मिल कर क्या कर लोगे! ) जो जीवन/ धर्म/ गुरु मिले उसका सदुपयोग

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साधना/आराधना

मोक्षमार्ग दो ही हैं । 1. साधना 2. आराधना जब तक साधना नहीं कर पा रहे हो, तब तक आराधना तो करो । आचार्य श्री

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साधु/व्रती-पद

साधु/ व्रती सदैव याद रखें >> दीक्षा अपने बल/भरोसे पर ली जाती है, औरों/समाज के बल पर नहीं। व्रती को अपने व्रतों के नियंत्रण में

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मन

मुनि श्री प्रमाणसागर ने किसी विषय पर आचार्यश्री से कहा – “ये मन को अच्छा नहीं लग रहा” आचार्यश्री – मैने दीक्षा आत्मा को अच्छा

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मंगल आशीष

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