साधना से प्रभावना होती ही है,
पर प्रभावना के लिये साधना करना उत्कृष्ट साधना नहीं ।
चिंतन
प्रत्येक काम जोख़िम भरा होता है ।
परंतु कुछ भी नहीं करना तो उससे भी बड़ा जोख़िम है ।
(अनुपम चौधरी)
विपरीतता प्रकृति का नियम है ।
प्रतिकूल वातावरण में अनुकूल की साधना ही सच्ची साधना है ।
हीरा कोयले की खान में ही ।
शंख/गाय किसी भी रंग का खाकर सफेद रंग का शरीर/दूध बनाते हैं ।
मुनि श्री महासागर जी
और यह साधना सम्भव होती है …गुरु कृपा से …
गुरु ?
माँ ही प्रथम गुरु है,
और
गुरु ही पूर्ण माँ … गुरु पूर्ण माँ

Nazim Hikmat the great Turk poet (Faiz was one of his admirers) once asked his friend Abidin Dino (Turkish artist and a well-known painter) to draw picture of happiness. Since then “Can you paint the picture of happiness for me, Abidin?” is a well-known phrase for Turks. This painting is famous. The whole family is cramped up on a broken bed under a leaked roof in a shabby room…
(Dr.P.N.Jain)
बिना गुरु के सिखाये नृत्य को मयूर नृत्य कहते हैं ।
मयूर नृत्य करते समय अपने गुप्तांग को उघाड़ लेता है जो अभद्र दिखता है ।
जिससे डरोगे, वही बनोगे ।
भगवान/गुरु/कानून सबमें लगा लेना ।
मुनि श्री सुधासागर जी
दही के बर्तन में बिना जामुन के दूध ऐसा जम जाता है कि जमा (जमाना) उल्टा कर दो तो भी ना गिरे ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
प्रश्न :- वजन बढ़ जाए, तो क्या करें ?
उत्तर :-तन का बढे़ तो व्यायाम,
मन का बढे़ तो ध्यान,
और
धन का बढे़ तो दान ।
(अपूर्वश्री)
बिना संयम के काले बाल वालों पर भरोसा मत करना ;
Army area में Civilian का जाना वर्जित होता है ।
श्रावकों की सुनो मत/मानो मत, श्रमण को अपनी बात सुनानी चाहिये/श्रावकों से मनवानी चाहिये ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
“B” से “Birth”
और
“D” से “Death”
इन दोनों में से एक भी हमारे हाथ में नहीं है,
परन्तु
“B” और “D” के बीच में होता है “C”
“C” से “Choice”… ये हमारे हाथ में है,
जीवन कैसे जीना है, ये हमारे हाथ में है ।
“वर्तमान” को आनंद से जीओ,
“भूतकाल” को भूल जाओ,
“भविष्य”को कुदरत पर छोड़ दो ।
(सुरेश)

(सुरेश)
उपकार करके यदि कह दिया तो वह व्यापार हो गया ।
जब सीता जी को वनवास दिया तब उनके मन में यह भाव भी नहीं आया कि मैंने राम को वनवास में साथ दिया था ।
ज्ञानी उपकार को कर्त्तव्य मानता है ।
मुनि श्री सुधासागर जी
जिस सीट के लिये इतनी मारपीट/झगड़ा किया, उसे स्टेशन आने पर छोड़कर चुपचाप चल देते हैं ।
अंत समय आने पर !
लालमणी भाई – चिंतन
गुरु/भगवान को पाकर अहोभाग्य अनेकों बार माना, फिर कल्याण क्यों नहीं हुआ ?
मार्ग तो मिला पर मंज़िल नहीं, क्योंकि गुरु हमें पाकर धन्य नहीं हुये; माता-पिता, समाज, धर्म, देश धन्य नहीं हुए ।
मुनि श्री सुधासागर जी
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