परिस्थितियों से नहीं, परिणामों से डरो,
परिस्थितियाँ तो थोड़े समय के लिये निर्मित होती हैं,
परिणाम स्थायी प्रभाव छोड़ते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

चित्र के साथ जब “वित्त”*  जुड़ जाता है तब वह चित्र, विचित्र बन जाता है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

* जब चित्र(कला) से पैसा जुड़ जाता है, तब कला व्यवसाय बन जाती है/ अपना सौंदर्य खो देती है ।

सामने वाले के गलत क्रम में लगे बटनों को देखकर अपने बटन चैक करना, ताकि हंसी के पात्र न बन जाएं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

पूर्ण सत्य तो भगवान ही जानते/कह सकते हैं ।
संसारी/संसार चलाने के लिये असत्य पर भी विश्वास करता है जैसे ज़हर से बनी दवा बीमारी को ठीक करती है ।

मुनि श्री सुधासागर जी

तीतर के दो आगे तीतर, तीतर के दो पीछे तीतर;
आगे तीतर, पीछे तीतर, बोल कितने तीतर ?
तीन ।
नाम ?
भूत, वर्तमान, भविष्य ।
भूत के आगे वर्तमान तथा भविष्य रहता है, भविष्य के पीछे वर्तमान तथा भूत, वर्तमान के पीछे भूत तथा आगे भविष्य रहता है ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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April 8, 2022

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