साधुजन अपनी रक्षा खुद नहीं करते, चाहे उनके पास कितनी भी मंत्रादि शक्त्तियाँ हों क्योंकि उसमें दुश्मन की हिंसा होगी ।
उनकी रक्षा का दायित्व श्रावकों पर होता है ।

मुनि श्री सुधासागर जी

ग्वालियर में वर्षा कम होने का कारण – “नमी का कम होना” ।
इसीलिये रेगिस्तानों में बहुत कम तथा तटीय क्षेत्रों में बहुत ज्यादा बारिश होती है ।
ऐसे ही प्राय: पुण्य से पुण्य, पैसे से पैसा अर्जित होता है ।

चिंतन

दुश्मन चाहे मनुष्य रूप में हो या कर्मरूप में, वह तो अपना स्वार्थ देखेगा ही ।
आप उसे यह नहीं कह सकते कि… हे ! मुसीबत मुझे मत सताओ ।
अपनी मन, वचन, काय रूपी ढाल तथा पुरुषार्थ रूपी तलवार से वीरों की तरह Defence/Attack करना होगा ।

मुनि श्री सुधासागर जी

बच्चों को राजकुमार मानो/राजकुमारों की तरह परवरिश करो, चलेगा ।
पर राजा मत मान लेना वरना वे ख़ुद तो सैनिक ही बन पायेंगे और माता-पिता उनके सेवक !

गौरव – चिंतन

पतली पगंडडी पर दो बकरियां आमने-सामने आ गयीं ।
एक बैठ गयी, दूसरी उसके ऊपर से निकल गयी ।
वरना एक या दोनों गिरतीं/गिराईं जातीं ।

मुनि श्री सुधासागर जी


संघ की आर्यिका माताओं के दीक्षा-दिवस पर आर्यिका विज्ञानमति माता जी अपनी दीक्षा के समय के भावों को व्यक्त करते हुए कहा… “उस समय मुझे लग रहा था कि मेरी वृद्धावस्था सी आ गयी है । संयम तो 8 वर्ष पर लेना चाहिए था । 14 वर्ष असंयम में बिगाड़ दिये ।”

समय से पहले फल चखने का भाव न करें ।
क्योंकि अधपका फल स्वादिष्ट नहीं, स्वास्थ्यवर्धक भी नहीं तथा उसमें हिंसा (जीवराशि) ज्यादा ।
ताप (तप) से पकाने पर लाभदायक ।
(इसीलिये जबलपुर के अस्पताल का नाम “पूर्णायु” रक्खा है)

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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April 8, 2022

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