काया का कायल नहीं, काया में हूँ आज ।
कैसे काया-कल्प हो, ऐसा हो कुछ काज ।।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

(हम तो आज चाय के भी कायल हैं)

Experiences are like waves,
They come to you on shore of life;
Drag the sand from beneath your feet,
But each wave makes you stand on a new base.

अनुभव लहर की तरह होते हैं,
जीवन के तट पर वे आपके पास आते हैं;
आपके पैरों के नीचे से रेत खींच लेते हैं,
लेकिन प्रत्येक लहर आपको एक नए आधार पर खड़ा करती है ।

(सुरेश)

कौन से कर्म बढ़ रहे हैं इसका पता कैसे लगे ?

क्रिया करने के बाद यदि सुकून/आनंद आ रहा है तो शुभ-कर्म बढ़ रहे हैं,
यदि आकुलता हो रही है तो अशुभ कर्म बढ़ रहे हैं ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

आत्मिक रिश्तों का कभी ब्रेक-अप नहीं होता ।
जहाँ विश्वास होता है, वहाँ चैक-अप नहीं होता ।
जी लो मन भर के,
क्योंकि….
बीते हुये समय का कोई बैक-अप नहीं होता ।

(सुरेश)

छोटा सा कंकड़ भी पानी में डूब जाता है, बड़ा भारी खंबा नहीं, क्योंकि कंकड़ की घनिष्टता ज्यादा होती है ।
पैसा थोड़ा हो, घनिष्टता ज्यादा, तो डूब जाओगे ।

शंकर न बन पाओ, पर कंकर मत बनना ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

जब एक केस की फ़रियाद के लिये वकीलों को (गर्मियों में भी) काली Uniform पहननी होती है तो असंख्यात गुनाहों की फ़रियाद के लिये (भगवान की पूजा के समय) Prescribed Dress नहीं होनी चाहिये क्या ?

मुनि श्री सुधासागर जी

उत्साह का जीवन में वही Role है जो किसी भी गाड़ी के पहियों में हवा का ।
गाड़ी का इंजन चाहे कितना ही शक्तिशाली क्यों ना हो, पहियों में हवा के बिना दौड़ नहीं सकती ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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