कर्म…..
सिर्फ़ मिलाने का काम करता है ।

पुरुषार्थ …..
संम्बधों में नज़दीकियां या दूरियाँ बढ़ाने का काम…..
व्यक्ति स्वयं करता है ।

(अनुपम चौधरी)

मौलिकता का मतलब परम्पराओं को तोड़ना नहीं, केवल लीक से हटकर आगे बढ़ना, अच्छे को अपनाना, बाकी से सुरक्षित दूरी रखना है ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

फल एक बार ही स्वाद (खट्टा या मीठा) देता है,
कर्म भी एक बार फल देकर झर जाते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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April 8, 2022

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