पंडित लोग प्राय: अज्ञात/अंदर के विषयों की चर्चा करते हैं जैसे आत्मादि,
जबकि साधुजन ज्ञात/बाह्य क्रियाओं की ।
क्योंकि पंडित प्राय: आचरणों से दूर रहते हैं और साधुजन प्राथमिकता देते हैं ।
चिंतन
श्रावकों का कल्याण करते समय – गुरु,
अपना कल्याण करते समय – साधु ।
निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी
पूजादि करके क्रोधादि करने पर दोष ज्यादा लगता है,
जैसे…
हाथी पर धूल तो लगती/गिरती रहती है पर वह नहाने के बाद यदि धूल में खेलेगा तो धूल बहुत चिपकेगी तथा देर तक चिपकी रहेगी ।
क्षमा करने से “क्रोध” समाप्त, क्षमा माँगने से “मान” समाप्त ।
(मंजू)
उम्मीदों का दामन थामा है तो हौसलों का भी थामे रहना;
जब नाकामियाँ चरम-सीमा पर होतीं हैं,
तब कामयाबीयाँ बहुत करीब होतीं हैं ।
(मंजू)
जो पुण्य-कर्मों में आगे,
और
पाप-कर्मों में (सबसे) पीछे रहे ।
जो बिना बोली (लगाये) खूब बोल दे, वह धर्मात्मा ।
मुनि श्री प्रमाण सागर जी
भक्त… प्रभु ! बस मेरी एक करोड़ रुपए की लौटरी निकलवा दो ।
प्रभु… टिकट का नम्बर बता !
भक्त…टिकट तो खरीदी नहीं है ।
प्रभु…????
मुनि श्री प्रमाण सागर जी
The more things change,
the more they remain the same.
(Gaurav)
एक निवाला पेट तक पहुंचाने का…नियति ने क्या ख़़ूब इंतजाम किया है…
अगर गर्म है, तो हाथ बता देते हैं ;
सख़्त है, तो दांत ;
कड़वा या तीखा है, तो ज़ुबान ;
बासी है, तो नाक बता देती है ;
बस मेहनत का है या बेईमानी का !…
इसका फैसला आपको करना है…!!
(मंजू)
जो कह दिये, वह शब्द थे ….
जो नहीं कह सके, वह अनुभूतियां थीं !
और….
जो कहना है, फिर भी नहीं कह सकते, वह मर्यादा है !!
????????सुरेश????????
????????????????????????????????
रिश्तों में झुकना कोई अज़ीव बात नहीं,
सूरज भी तो ढल जाता है, चाँद के लिए !
जीवन के कुछ संबंध ऐसे होने चाहिए !!
(सुरेश)
मांगने पर तो मूल्यहीन वस्तुयें ही मिलतीं हैं जैसे भीख ।
बिनमांगे मूल्यवान जैसे वृक्ष से छाया/ अग्नि से उष्णता/ वर्फ से शीतलता/ फूल से सुगंधि तथा भगवान से कृपा,
बस उनसे निकटता बनानी होगी ।
घड़ी बंद करने से घड़ी तो बंद हो सकती है, पर समय नहीं;
झूठ छिपाने से झूठ तो छुप सकता है, पर सत्य नहीं ।
आचार्य श्री सन्मति सागर जी
माँ सोचती है… बेटा आज भूखा ना रहे,
पिता सोचता है कि बेटा कल भूखा ना रहे ।
बस यही दो सम्बन्ध ऐसे हैं संसार में, जिनका दर्जा भगवान् के बाद में आता है..!
????जय जिनेंद्र????
(सुरेश)
Pages
CATEGORIES
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत – अन्य
- प्रश्न-उत्तर
- पहला कदम
- डायरी
- चिंतन
- आध्यात्मिक भजन
- अगला-कदम
Categories
- 2010
- 2011
- 2012
- 2013
- 2014
- 2015
- 2016
- 2017
- 2018
- 2019
- 2020
- 2021
- 2022
- 2023
- 2024
- 2025
- 2026
- News
- Quotation
- Story
- Uncategorized
- अगला-कदम
- आध्यात्मिक भजन
- गुरु
- गुरु
- चिंतन
- डायरी
- पहला कदम
- प्रश्न-उत्तर
- वचनामृत – अन्य
- वचनामृत – मुनि श्री क्षमासागर
- वचनामृत-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण – मुनि श्री क्षमासागर
- संस्मरण – अन्य
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
- संस्मरण-आचार्य श्री विद्यासागर
Recent Comments