एक जुट हों,
एक से जुड़ें नहीं;
बेजोड़* बनो ।

*अखंड/अद्वितीय/व्यापक/अपूर्व

आचार्य श्री विद्यासागर जी

मुसीबतें नसैनी के टूटे डंडे जैसी होती हैं ।
जो Extra पुरुषार्थ करके चढ़ते हैं, वे जल्दी मंज़िल पर पहुँचते हैं तथा भविष्य के लिये आदत भी पड़ जाती है ।

चिंतन

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