सूप बेकार को छोड़ता है – साधु ।
छलनी बेकार को ग्रहण करती है – गृहस्थ ।।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

अच्छा काम करने पर कैदियों को चंदन की लकड़ियाँ मिलीं ।
एक जलाकर खाना बनाने लगा ।
दूसरा घिसकर खुशबू लेता था ।
तीसरे ने सीढ़ी बनायी, जेल के बाहर हो गया ।
हम किस श्रेणी के हैं ?

चिंतन

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