अनुभूति का संबंध जाति/पर्याय से नहीं है ;
ज्ञानी को नहीं, अंर्तज्ञानी को होती है ।

नियम सब हमने बनाए हैं ताकि हम बने रह सकें,

लेकिन हो यह रहा है कि नियम तो बनते जा रहे हैं लेकिन हम टूटते जा रहे हैं ।

गुरुवर पूज्य मुनि श्री क्षमा सागर जी

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