एक शैतान ने एक बुज़ुर्ग से कहा तुम्हें ईश्वर पर बहुत विश्वास है ?
तो एक काम करो,
एक ऊँचे पहाड़ से छलांग लगा कर बताओ,
यदि तुम्हारा ईश्वर तुम्हारी रक्षा कर ले तभी मानूँगा कि ईश्वर है ।
बुज़ुर्ग व्यक्ति ने मुस्कुराकर जवाब दिया…..
यह ईश्वर का काम है कि वह मुझे आज़माए,
मेरा काम नहीं कि मैं ईश्वर को आज़माऊँ ।
दूसरा,
मैं भगवान की बात मानता हूँ,
शैतान की नहीं ।


संसार में दो प्रकार के वृक्ष हैं….

प्रथम ???? अपना फल अपने आप दे देते हैं – उदाहरण :- आम, अमरुद, केला इत्यादि …
द्वितीय ???? अपना फल छिपाकर रखते हैं -उदाहरण :- आलू, अदरक, प्याज़, इत्यादि ..

जो अपना फल अपने आप दे देते हैं उन वृक्षों को सभी सुरक्षित रखते हैं किन्तु जो अपना फल छिपाकर रखते है, वे जड़ सहित खोद लिए जाते हैं।

ठीक इसी प्रकार जो अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वयं ही समाज सेवा में दे देते हैं, सभी उनका ध्यान रखते हैं । वहीं दूसरी ओर जो अपनी विद्या, धन, शक्ति स्वार्थवश छिपाकर रखते हैं, वे समय रहते ही भुला दिये जाते हैं ।

(रजनी)

हम सब को बहुत सी रहमतें बख्शी जिसमें से तीन ये हैं :

1. अनाज में कीड़े पैदा कर दिए ,
वरना लोग इसे सोने और चाँदी की तरह जमा करते

2. मरने के बाद जिस्म में बदबू पैदा की ,
वरना कोई अपने प्यारों को जलाता या दफ़न नहीं करता

3. मुसीबत के बाद सब्र और सुकून दिया व भूलने की आदत,
वरना ज़िंदगी कभी ख़ुशगवार ना होती।

(नमिता-सूरत)

कोई भी व्यक्ति आपके
पास तीन कारणों से आता है !
भाव से,अभाव से या प्रभाव से ।

यदि भाव से आया है तो उसे प्रेम दो,
अभाव से आया है तो मदद दो,
और यदि प्रभाव से आया है,
तो प्रसन्न हो जाओ कि परमात्मा ने आपको इतनी क्षमता दी है ।

(श्रीमति शर्मा)

निराशा असफ़लता की पहली निशानी है ।
असफ़लताऐं तो सफ़लता की सीढ़ीयाँ हैं ।
प्रशंसा को प्रोत्साहन और निंदा को चेतावनी मानने वाले ही सफ़ल होते हैं ।

क्षु. श्री ध्यानसागर जी

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