Since childhood we are made used to Denial of reality.
For us to raise our life to a new height,
we need to over-come this habit,
and
become vigilant to power of our conscience.

परेड में “About Turn” बोलते ही,
पहला आदमी आख़िरी और आख़िरी आदमी पहले नंबर पर आ जाता है।

जीवन में कभी आगे होने का घमंड
और आख़िरी होने का ग़म न करें,
पता नहीं कब ज़िंदगी “About Turn” बोल दे।

(आर.के.गुप्ता)

आज़ाद रहना चाहते हो तो दूसरों को गुलाम मत बनाओ,
दूसरों* की गुलामी मत करो ।

*क्या हम अपने ही सेवकों / अपनी आदतों और अपनी सुविधाओं के गुलाम नहीं हैं ?

चिंतन

नदी में गिरने से किसी की जान नहीं जाती,
जान तभी जाती है जब तैरना नहीं आता ।

परिस्थितियाँ कभी समस्या नहीं बनतीं,
समस्या तभी बनती है जब हमें परिस्थितियों से निपटना नहीं आता ।

(सुरेश)

25 से 50 वर्ष तक चिंता करते हैं…
“लोग क्या कहेंगे !”

50 वर्ष के बाद समझ आता है…
लोगों को पड़ी ही नहीं है, तुम्हारे बारे में कुछ कहने के लिये लोगों के पास समय ही नहीं है ।

(कट्टू-विदिशा)

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