Punctuality is not just about ”being on time.”
It’s basically about ”respecting our own commitments”…

(Parul-Delhi)

भावों को दर्शाने का माध्यम और सबसे अच्छी अभिव्यक्ति मातृभाषा में ही हो सकती है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

मत शिक्षा दो इन बच्चों को आसमान छू लेने की,
चाँद सितारे छूने वाले छूमंतर हो जाते हैं ।

अगर दे सको, शिक्षा दो तुम,
इन्हें चरण छू लेने की ।
जो मिट्टी से जुड़े रहेंगे,
रिश्ते वही निभायेंगे ।

(अपूर्व श्री)

रास्ते पर कंकड़ ही कंकड़ हों,
तो भी एक अच्छा जूता पहनकर
उस पर चला जा सकता है..

लेकिन यदि एक अच्छे जूते
के अंदर एक भी कंकड़ हो तो
एक अच्छी सड़क पर भी
कुछ कदम भी चलना मुश्किल है ।।

यानि –

“बाहर की चुनौतियों से नहीं
हम अपनी अंदर की कमजोरियों
से हारते हैं ”

(आशीष मणी)

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