हर बार कमरे से निकलते समय निश्चित करें कि कमरा पहले से बहतर हो।
जीवन पहले से बहतर होता जायेगा।

(कानन बिहारी)

भक्त ,सूर्य देव (जो बादल से ढके हुये थे) को जल चढ़ा रहा था।
सूरज तो दिख नहीं रहे ?
अभी नहीं दिख रहे, पर हैं तो !
आज न सही, कल ,कल न सही ,परसों दिख जायेंगे!!

चिंतन

इतिहास कहता है – भूत में सुख था,
विज्ञान का कहना है – भविष्य में सुख होगा,
धर्म का कहना – आज में सुख है।
आज का सुख, भूत और भविष्य को भी सुखी कर देगा।

श्रीमती सुनीति(चिंतन)

– “आज” में “आ” सुख को आमंत्रण देता है,
“ज” भूत को इंगित करता है।

जो पत्थर छैनी/हथौडों की चोट से टूट जाते हैं,
उन्हें फर्श पर बिछा दिया जाता है और पैरों से कुचल जाते हैं।
जो सह लेते हैं ,वे भगवान(मूर्ति) बन जाते हैं/पूजे जाते हैं।

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