दु:खी होकर/अज्ञानता से शरीर छोड़ने के भाव से पापबंध,
मोक्ष सुख के लिये आनंद और ज्ञान सहित समाधिमरण करने से पुण्य/मोक्ष ।
क्रिया दोनों में एक ही है ।

चिंतन

तीनों में “मा” है ।
पर माँ 18 साल तक, महात्मा 50 तक ,परमात्मा अंत तक Guide करते हैं ।
(जो मंदबुद्धि होते हैं वे बुढ़ापे तक माँ का पल्लू पकड़े रहते हैं )

(पं. सुगनचंद्र जैन – शिवपुरी)

भिखारी भजन गाकर भीख माँग रहा था ।
सेठानी रोटी लेकर खडी रही पर रोटी दे नहीं रही थी ।
सेठ – रोटी दे क्यों नहीं रहीं ?
भजन बहुत अच्छा लग रहा है ।

यदि भगवान के गुणगान का फल नहीं मिल रहा तो मानना कि भगवान को आपका गुणगान अच्छा लग रहा है ।

(डॉ.अमित)

आचार्य श्री से किसी ने पूछा – आपके इतने चाहने वाले हैं, सब आपको याद करते रहते हैं तो आपको हर समय हिचकी आती रहती होगी ?
आचार्य श्री – हिचकी तो तब आती है जब दोनों ओर से याद किया जाये ।।

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