जीवन समस्या नहीं,
रहस्य है;
जिसे आपको सुलझाना है।

स्वामी विवेकानंद जी

आचार्य श्री विद्यासागर जी कभी भी अपने शिष्यों की गलतियों को बताते नहीं, सिर्फ इशारा कर देते हैं ।
शिष्य खुद गलती स्वीकार कर प्रायश्चित माँगें, तब देते हैं ।

वादविवाद में अटकन है/ठहराव है,
भक्ति में गति ।
जिसके प्रति भक्ति की जायेगी, गति वहीं तक होगी जैसे दुकान के प्रति तो वहाँ तक, भगवान के प्रति तो मंदिर तक, रागी के प्रति तो उस व्यक्ति तक, असीम/वीतरागता के प्रति तो मोक्ष तक ।

चिंतन

हर समय/हर बात के लिये सहारा लेने वाले जल्दी ही बेसहारा हो जाते हैं ।
जो हारा वह सहारा लेता है, दूसरों के सहारे कोई जीतता नहीं है ।
ख़ुद का सहारा लेने वालों को ख़ुदा भी सहारा देता है ।

चिंतन

10 kg पंख या 10 kg पीतल में से क्या ढोना पसंद करोगे ?
पीतल
क्यों ?

  • ढोने में आसानी
  • लोगों की नज़र में कम आयेगा

पाप भी पंख जैसा होता है-
ढोने में कठिन,
लोगों की नज़र से छुपाना भी कठिन ।

(तोषिता)

जिसको भी गलत तस्वीर दिखाई , उसे ही खुश रख पाया मैं ;
दर्पण दिखाने पर तो , सारे ही रुठ गये मुझसे ।

(श्री तुषार)

दर्पण अपनी ओर रखो, पीछे का भाग दूसरों की ओर ;
अपना कल्याण , दूसरे खुश ।

चिंतन

इति + हास = वह भूतकाल जो हँसी का पात्र है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

(जन्म जन्मांतरों में किया क्या है ?
जीवनों को यों ही गंवाते आये हैं ।)

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