बहुत सुन्दर शब्द जो एक मंदिर के दरवाज़े पर लिखे थे ।

अगर तुम अन्याय, अत्याचार और पाप करते करते थक गए हो तो अंदर आ जाओ ।
… क्यूंकि …
भगवान मेहरबानियाँ करते करते अभी नहीं थके हैं ।

परोक्ष में निंदा से उसका (जिसकी निंदा की जा रही है) बुरा नहीं, निंदा करने वाले का अवश्य,
प्रत्यक्ष में निंदा से उसका भला, अपना भी ।

मुनि श्री कुंथुसागर जी

रावण ने पूरी ज़िंदगी भोग भोगे, राम ने वनवास ।
रावण को हर साल रामलीला मैदान में जलाया जाता है, राम को मोक्ष सुख हमेशा हमेशा के लिये ।

मुनि श्री सुधासागर जी

मोबाईल में दो कैमरे, एक आगे का फोटो खींचता है, दूसरा पीछे का ।
पर एक समय में एक और एक का ही ।
संसार की ओर मुख करोगे तो मोक्षमार्ग छूट जायेगा/दिखेगा ही नहीं ।

चिंतन

एक काफिला सफ़र के दौरान अँधेरी सुरंग से गुजर रहा था । उनके पैरों में कंकरियाँ चुभीं,
कुछ लोगों ने इस ख्याल से कि किसी और को ना चुभ जाये,
नेकी की खातिर उठाकर जेब में रख लीं ।
कुछ ने ज्यादा उठायीं कुछ ने कम।
जब अँधेरी सुरंग से बाहर आये तो देखा वो हीरे थे ।
जिन्होंने कम उठाये वो पछताए कि ज्यादा क्यों नहीं उठाये ।
जिन्होंने नहीं उठाए वो और पछताए ।
दुनियाँ में जिन्दगी की मिसाल इस अँधेरी सुरंग जैसी है और नेकी यहाँ कंकरियों की मानिंद है ।
इस जिंदगी में जो नेकी की वो आखिर में हीरे की तरह कीमती होगी और इन्सान तरसेगा कि और ज्यादा क्यों ना की ।

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