जब तक तेरे पुण्य का बीता नहीं करार,
तब तक तुझको माफ़ हैं, औगुन करे हजार ।

श्री लालमणी भाई

एक ही शरीर में तीन अलग अलग आदतें हैं –
सबसे ज्यादा सर्दी लगती है छाती को,
उससे कम हाथ पैरों को,
और सबसे कम मुँह को ।

जैसी आदत ड़ालो वैसी पड़ जाती है ।

चिंतन

जो बच्चे कक्षा में बार बार फेल होते हैं, उन्हें उसी कक्षा में बार बार रहना परता है ।
यदि हम कर्मोदय में बार बार फेल हो रहे हैं तो मान लें – हमारा संसार में बार बार आना निश्चित है ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

युद्ध में राम जाते थे तो भावना जीतने की रहती थी, हराने की नहीं ।
इसीलिये वे कर्मों को जीतकर भगवान बन गये ।
साधारण योद्धा, हराने के लिये युद्ध करता है कभी हारता है, कभी जीतता है पर मोक्ष नहीं जाता ।

चिंतन

व्यवसाय में पहले पैसा लगाते हो, मेहनत करते हो, तब फायदा होता है ।
बैंक में पैसा जमा करते हो, तब व्याज मिलता है ।
बिना पुरुषार्थ किये, गुरू/भगवान की कृपा की अपेक्षा क्यों करते हो ?

चिंतन

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